अनधिकृत कॉलोनी के अनधिकृत लोग

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हाल ही में दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार ने एक बहुत ‘अच्छा’ आदेश जारी किया है। जी जनाब सरकार कह रही है तो जरूर अच्छे और सरल नियम भी होंगे।

“सरकार ने अनधिकृत कॉलोनियों में संपत्तियों की रजिस्ट्री और नियमितीकरण के नियमों को आसान बना दिया है। अब केवल GPA (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) या वसीयत के आधार पर रजिस्ट्री मान्य नहीं होगी; निवासियों को केंद्र सरकार की PM-UDAY Scheme के तहत संपत्ति का पक्का मालिकाना हक (Conveyance Deed) लेना अनिवार्य कर दिया गया। इससे भी अच्छी बात है कि अनधिकृत कॉलोनियों को बिना किसी अनिवार्य ले-आउट प्लान के वर्तमान स्थिति में नियमित किया जा रहा है।  अब ले-आउट प्लान की बाध्यता खत्म कर दी गई है। निवासी MCD द्वारा empanelled architects से बिल्डिंग प्लान तैयार करवाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया को सरल और विकेंद्रीकृत करने के लिए, PM-UDAY का संचालन Delhi Revenue Department को सौंप दिया गया है। सभी प्लॉटों और इमारतों का लैंड-यूज़ अब केवल ‘आवासीय’ माना जाएगा। PM-UDAY के माध्यम से स्वामित्व अधिकार प्राप्त करने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर 2026 तय की गई है। दिल्ली की 69 ‘समृद्ध’ (affluent/posh) अनधिकृत कॉलोनियों (जैसे सैनिक फार्म, महेंद्रू एन्क्लेव, अनंतराम डेयरी आदि) को इस ‘राहत’ से पूरी तरह बाहर रखा गया था। यमुना खादर (Zone-O), नोटिफाइड या आरक्षित वन क्षेत्र, एएसआई (ASI) संरक्षित ऐतिहासिक स्थल, हाई-टेंशन तारों के नीचे और रिज एरिया (Ridge Area) में आने वाली संपत्तियों को मालिकाना हक देने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। नियम के अनुसार केवल उन्हीं कॉलोनियों और संपत्तियों को पात्र माना गया जो 1 जून 2014 तक अस्तित्व में थीं और जहां 1 जनवरी 2015 तक कम से कम 50% निर्माण (built-up area) हो चुका था। दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों (Unauthorized Colonies) और GPA (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी)/वसीयत/बिक्री समझौते के आधार पर होने वाली संपत्तियों की खरीद-बिक्री को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कई ‘ऐतिहासिक’ और ‘कड़े’ फैसले दिए हैं और इन्हें संपत्ति स्वामित्व का आधार नहीं माना है।”

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सरकार इससे पहले भी चरणबद्ध रूप से कई कॉलोनियों को नियमित कर चुकी है। आखिर करे भी क्यों न, कल्याणकारी राज्य वाले लोक तंत्र की सरकार जो है। दिल्ली की लगभग 1.5 करोड़ आबादी का ख्याल सरकार नहीं रखेगी तो कौन रखेगा! न्यायालय इनका दर्द नहीं समझेगी तो कौन समझेगा!

पर मुझे एक बात ईमानदारी से बताइए क्या आपको ये ‘सरल’ ‘आसान’ ‘सुविधाजनक’ प्रावधान समझ में आ गया? सरकार ने इतने लोगों के पूरे जीवन से संबन्धित निर्णय मात्र एक प्रशासनिक आदेश से ले लिया। टैक्स के लिए क्या नियम होंगे? कोई नीति या कानून है क्या इसके लिए? पहले के नियमों और आदेशों का क्या हुआ? सरकार ने 2002 में भी कुछ आदेश निकाला था, उनका क्या हुआ? लोगों को इस समस्त प्रक्रिया बताने के लिए क्या किया जाएगा? ऐसे दर्जनों प्रश्न हैं।

इससे भी बड़ी बात यह कि वे कौन लोग हैं जो अपनी पूरी जमापुंजी लगा कर एक छत खरीदते हैं लेकिन उसके लिए पक्के दस्तावेज़ नहीं बनवाते? वास्तव में ये कॉलोनी सरकारी दस्तावेजों में ‘अनधिकृत’ होती हैं। ‘अनधिकृत संपत्ति’ को सरकार अधिकृत रूप से कैसे ‘पंजीकृत’ करे? इसलिए वहाँ GPA द्वारा खरीद बिक्री होने लगी। जीपीए के साथ वसीयत, sale of deed, possession letter, रसीद आदि कई दस्तावेजों का एक सेट बनाते हैं। अब चूंकि जमीन की रजिस्ट्री तो हो नहीं सकती इसलिए जो लोग अधिक सुरक्षा चाहते हैं, वे इन दस्तावेजों का रजिस्ट्री करवा लेते हैं। पर सरकार और कोर्ट लगातार कह रही है कि ये स्वामित्व के दस्तावेज़ नहीं हैं यानि अगर आपने इन दस्तावेजों के जरिए कोई संपत्ति खरीदा है तो आप कानूनी रूप से इसके मालिक नहीं हैं।

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ये ‘अनधिकृत कॉलोनी’ रातों रात नहीं बनी। कई सरकारें आई-गई, कई अधिकारी आए-गए, किन्हीं ने इन्हें नहीं रोका क्योंकि इनसे बहुतों को फायदा था। इन्हें भी ये पता था कि इनके पास वोट की इतनी ताकत है कि इनको बाद में हटाया नहीं जा सकता है। फिर सरकारें मानवीय आधार पर इन्हें सड़क, बिजली, पानी, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, राशन कार्ड- सब देती हैं। यहाँ तक कि विधान सभा, लोक सभा सीट भी बन जाती है। इन अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले अनधिकृत लोगों के अनधिकृत घरों के पते पर बने वोटर कार्ड से सांसद, विधायक, पार्षद आदि चुने जाते हैं जो कि अधिकृत होते हैं, लेकिन ये अनधिकृत ही रह जाते है। सरकार और कोर्ट कहती है कि ये अपने घर के मालिक नहीं हैं, ये किराएदार नहीं हैं, trespasser भी नहीं हैं, क्योंकि ये उसी घर के बिजली, पानी आदि का बिल देते हैं, टैक्स  देते हैं, घुसपैठिए नहीं हैं, क्योंकि वोट देते हैं, तो फिर अपने ही देश में, अपने ही शहर में, अपने ही घरों में, अनधिकृत ये लोग कौन हैं, कानून या सरकार इन्हें किस श्रेणी में रखती है? 

ये अनधिकृत-अधिकृत का चक्कर कुछ समझ आया आपको? खैर मैं तो यही कहूँगी ‘जी जनाब सरकार, आप जो कह रहे हैं, जो कर रहे है, ठीक ही होगा, आखिर आप हमारे सरकार जो हैं।  

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