मिर्जा गालिब: उर्दू और फारसी के महान शायर

“रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायलजब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है।” यह पंक्ति

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रामधारी सिंह दिनकर: राष्ट्र कवि

याचना नहीं अब रण होगा, जीवन जय या मरण होगा। जंजीर बढ़ा अब साध मुझे, हाँ हाँ दुर्योधन बांध मुझे।

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सुकरात: जिन्होने मृत्यु का भी हर्ष से स्वागत किया।

लगभग 500 लोगों की जूरी ने एक विशेष मुकदमा पर विचार किया और अभियुक्त को ‘युवाओं को स्थापित व्यवस्था और

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मिसाइलमैन ‘पीपुल्स प्रेसिडेंट’: डॉ. अब्दुल कलाम

वर्तमान उत्तराखंड का एक पवित्र शहर ऋषिकेश। गंगा का सुरम्य तट। एक युवक बेचैन सा टहल रहा था। उसका ध्यान

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