मैथिलीशरण गुप्त
‘सन्देश यहाँ मैं नहीं स्वर्ग का लाया इस भुतल को ही स्वर्ग बनाने आया’ इतना निसंकोच घोषणा करने वाले थे […]
‘सन्देश यहाँ मैं नहीं स्वर्ग का लाया इस भुतल को ही स्वर्ग बनाने आया’ इतना निसंकोच घोषणा करने वाले थे […]
भीष्म साहनी का लेखन एक गरीब हिन्दू व्यक्ति को एक मुस्लिम व्यक्ति कहता है कि उस वेटेनरी डॉक्टर को देने
नदी किनारे मैं खड़ी सो पानी झिलमिल होय, पी गोरी मैं साँवरी अब किस विध मिलना होय। रैन बिना जग
अमीर खुसरो: तोता-ए-हिन्द Read More »
“रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायलजब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है।” यह पंक्ति
मिर्जा गालिब: उर्दू और फारसी के महान शायर Read More »
याचना नहीं अब रण होगा, जीवन जय या मरण होगा। जंजीर बढ़ा अब साध मुझे, हाँ हाँ दुर्योधन बांध मुझे।
रामधारी सिंह दिनकर: राष्ट्र कवि Read More »