दृष्टिकोण

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एक बहुत धनी व्यक्ति का एक ही बेटा था। बच्चे को  ऐशोआराम की सभी चीजें उपलब्ध थी। उसने कभी किसी चीज की कमी नहीं देखि थी। जब वह बच्चा थोड़ा बड़ा हुआ तो उसके पिता को लगा कि उसे दुनिया के दूसरे गरीब लोगों के जीवन को जानना चाहिए ताकि वह समझ सके कि वह कितना सुखी और खुशकिस्मत है और अपनी संपत्ति का ठीक से उपयोग कर सके। इस उद्देश्य से पिता उसे एक गरीब किसान के घर ले गया।

दोनों पिता-पुत्र कुछ दिन वहाँ उस किसान के घर में रुक कर जब जाने लगे तब पिता ने पुत्र से उसका अनुभव पूछा। पिता को पूरी उम्मीद थी कि पुत्र कहेगा ये लोग कितने परेशानी में हैं, हमलोग इनकी तुलना में कितने खुशहाल हैं। लेकिन पुत्र ने जो कहा उससे पिता आश्चर्यचकित रह गया।

पुत्र ने खुशी से कहा ‘यह किसान परिवार कितना खुश और किस्मतवाला है। हमारे पास एक कुत्ता है, इनके पास 4 कुत्ते और मुर्गियाँ भी हैं। हमारे घर में 4 लोग हैं। लेकिन इनके घर में 12 लोग हैं साथ में खेलने के लिए। हमारे पास एक स्विमिंग पूल है लेकिन इनके पास तो इतनी बड़ी नदी है। हमलोग कभी-कभार खिड़की से आकाश और उसके चाँद तारों को देख लेते हैं। लेकिन ये लोग तो रोज खुले में सोते हैं और उन सुंदर नजारों को बिना किसी अवरोध के निहारते हैं। हमारे पास तो चारदीवारी से घिरा एक स्थान है पर उनके पास तो अंतहीन दिशाएँ हैं, घूमने-फिरने और काम करने के लिए। हमें राशन खरीदने दुकान जाना पड़ता है। पर ये लोग खुद से ही उगा लेते हैं। हमारी संपत्ति और परिवार की सुरक्षा के लिए हम चारदीवारी पर निर्भर हैं पर उन्हें इन चारदीवारी की जरूरत नहीं है, उनके परिवार और दोस्त ही उनकी सुरक्षा करते हैं।‘

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पुत्र उत्साह से पिता को बताता जा रहा था। वह इतने खुशकिस्मत लोगों से मिलाने के लिए पिता को धन्यवाद दे रहा है। पर पिता के पास शब्द नहीं थे प्रतिक्रिया देने के लिए।  

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