भारत में गोद लेने संबंधी कानून

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भारत में गोद लेने संबंधी कानून

भारत में गोद लेने की प्रक्रिया जिन क़ानूनों से प्रशासित होती हैं उनमें सबसे प्रमुख हैं ‘जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015, जिसे संक्षेप में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट या जेजे एक्ट कहते हैं। यह कानून देश के सभी नागरिकों पर लागू होता है चाहे वह किसी धर्म या जाति का हो। इसके अतिरिक्त कुछ व्यक्तिगत कानून भी हैं जो धर्म विशेष के लोगों पर लागू होते हैं। जैसे हिन्दू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम (हिन्दू एडोप्शन एंड मेंटेनेन्स एक्ट), 1956 जो केवल हिंदुओं पर लागू होता है। बच्चा गोद लेने के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण संस्था है ‘चाइल्ड एडोप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (Central Adoption Resource Authority)’ जिसे संक्षेप में कारा (CARA) कहते हैं।

इस संबंध में सबसे पहला प्रश्न तो यही उठता है कि दत्तक यानि गोद लेना क्या होता है? जेजे एक्ट, 2015 के सेक्शन 2(2) के अनुसार दत्तक वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा गोद दिए जाने वाले बच्चे का जन्म देने वाले माता-पिता से स्थायी रूप से संबंध समाप्त हो जाता है और वह गोद लेने वाले माता-पिता की विधिक संतान बन जाता/जाती है। बच्चे के प्राकृतिक माता-पिता के सभी अधिकार, विशेषाधिकार और दायित्व गोद लेने वाले माता-पिता के  साथ जुड़ जाते हैं।

यानि एक बार गोद लेने की प्रक्रिया पूर्ण हो जाए तो प्राकृतिक माता-पिता से संतान के संबंध और दत्तक लेने वाले माता-पिता के संबंध में कोई अंतर नहीं होता है। न ही प्राकृतिक माता-पिता या उसके परिवार से उस संतान का कोई संबंध रह जाता है।

गोद लेने की प्रक्रिया को कानून ने दो वर्गों में बांटा है- (1) भारत में रहने वाले व्यक्ति द्वारा गोद लेना, और (2) भारत से बाहर रहने वाले भारतीय या विदेशी मूल के व्यक्ति द्वारा गोद लिया जाना। इन दोनों के भी दो उपवर्ग हैं- रिशतेदारों के बच्चों को गोद लेना, अन्य बच्चे को गोद लेना।

देश के अंदर बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया यह है:

दत्तक लेने से पहले की प्रक्रिया

Þ सर्वप्रथम बच्चा चाहने वाले माता-पिता को अपना नाम CARINGS (Child Adoption Resource Information and Guidance System) (www.cara.nic.in) में पंजीकृत (रजिस्टर्ड) कराना होगा। यह पंजीकरण ऑनलाइन होता है। इसके लिए आईडी और पासवर्ड जेनेरेट करना होता है। इसके बाद रजिस्ट्रेशन नंबर जेनरेट हो जाता है। माँगे गए दस्तावेजों को 30 दिनों के अंदर वेबसाइट पर ऑनलाइन ही अपलोड करना होता है। पंजीकरण के समय ही आप बच्चे के लिए अपनी पसंद बता सकती हैं। साथ ही होम स्टडी रिपोर्ट (HSR) और राज्य के लिए अपनी पसंद भी बता सकते हैं।

Þ अगर किसी कारण से भावी दत्तक माता-पिता दत्तक के लिए उपयुक्त नहीं पाए जाते हैं तो उन्हें इसका कारण बताते हुए इसकी सूचना दे दी जाती है।

Þ रजिस्ट्रेशन सिर्फ भारत में रहने वाले भारतीय नागरिक ही कर सकते हैं।

दत्तक लेने की प्रक्रिया

Þ ‘गोद देने के लिए कानूनी रूप से उपलब्ध’ बच्चों में से अगर आपके द्वारा दी गई पसंद का बच्चा उपलब्ध हो तो आपको रेफ़र किया जाएगा। आपको 48 घंटे के अंदर यह बताना होगा कि आप रेफर किए गए बच्चे को गोद लेना चाहते हैं या नहीं। आपकी सहमति के 20 दिनों के अंदर दत्तक समिति दत्तक की प्रक्रिया पूरी करेगी।

Þ इसके बाद SAA (Specialized Adoption Agency) एक याचिका (पिटीशन) निर्धारित कोर्ट में दायर (फ़ाइल) करेगा जिसमें सह-याचिकाकर्ता (को-पिटिशनर) भावी दत्तक माता-पिता होंगे। यह पिटिशन पहले जुडिशियल कोर्ट में फ़ाइल होता था लेकिन वहाँ लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए अब प्रशासनिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में फ़ाइल किया जाता है।

Þ ऐसा पिटिशन स्वीकृति मिलने के 10 दिनों के अंदर फ़ाइल किया जाएगा। निर्धारित कोर्ट मामले की सुनवाई बंद कमरे (इन-कैमरा) में करेगा। कोर्ट 60 दिनों के अंदर केस पर निर्णय दे देगा। इसके बाद आप बच्चे को अपने घर ले जा सकते हैं।    

दत्तक लेने के बाद की प्रक्रिया

Þ लेकिन यह प्रक्रिया यहीं समाप्त नहीं होती है। इसके बाद बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन देना होगा। 8 वर्किंग दिनों के अंदर यह प्रमाणपत्र दे दिया जाएगा।

Þ गोद लेने के बाद दो वर्षों तक प्रत्येक छह महीने में सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दत्तक माता पिता के घर का विजिट कर रिपोर्ट दिया जाता है।

देश से बाहर के व्यक्ति द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया   

Þ देश से बाहर रहने वाले व्यक्ति, भले ही वह अनिवासी भारतीय (non-residential Indian) हो या कोई विदेशी, ये किसी भारतीय बच्चे को ऐसे Authorized Foreign Adoption Agency (AFAA), जो CARA के द्वारा सूचीबद्ध किए गए हो (AFAA की जानकारी CARA के वेबसाइट पर दी गई होती है), या CA (Central Authority under Hague Convention) के माध्यम से गोद  ले सकते हैं।

Þ उदाहरण के लिए दुबई में रहने वाला कोई आप्रवासी भारतीय अगर भारत के किसी बच्चे को गोद लेना चाहता है तो वह AFAA द्वारा ले सकता है क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात ने हेग कॉन्वेंशन पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

Þ इसी तरह अगर कोई ऐसा दंपत्ति जिसमें पति भारतीय नागरिक हो, लेकिन पत्नी अमेरीकन नागरिक हो, भारत में बच्चे को गोद लेना चाहते हैं तो वो ऐसा कर सकते हैं। किन्तु एडोप्शन रेगुलेशन के चैप्टर IV के अनुसार होम स्टडी रिपोर्ट उस देश द्वारा तैयार किया जाएगा जहाँ माता-पिता एक वर्ष से अधिक से रह रहे हों और जहाँ बच्चे को रखा जाना है।

Þ इसी तरह, अगर कोई व्यक्ति सिंगापुर में रहता हो, जहाँ भारत से गोद लेने के लिए कोई मान्यताप्राप्त एजेंसी नहीं है तो ऐसी स्थिति में गोद लेने के इच्छुक माता-पिता को वहाँ कार्यरत भारतीय राजनयिक मिशन से संपर्क करना होगा जो होम स्टडी रिपोर्ट बनाने और CARINGS (Child Adoption Resource Information and Guidance System) में पंजीकृत होने एवं डॉक्युमेंट्स अपलोड करने में उनकी मदद करेंगे।  

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   भारत के बाहर के निवासियों के लिए गोद लेने की ये प्रक्रिया है:

दत्तक लेने से पहले की प्रक्रिया

Þ AFAA (Authorized Foreign Adoption Agency) या CA (Central Authority under Hague Convention) के सामाजिक कार्यकर्ता (सोशल वर्कर) द्वारा होम स्टडी रिपोर्ट तैयार किया जाता है और दत्तक लेने वाले माता पिता की काउन्सलिंग की जाती है।

Þ इसके बाद भावी दत्तक माता पिता का रजिस्ट्रेशन CARINGS में AFAA/CA/IDM (Indian Diplomatic Mission) द्वारा की जाती है और उनके डॉक्युमेंट्स अपलोड किए जाते हैं।

दत्तक की प्रक्रिया

Þ CARA द्वारा आरंभिक स्वीकृति (approval)

Þ CARINGS द्वारा बच्चे को रेफर किया जाना और भावी दत्तक माता पिता द्वारा बच्चे को रिजर्व करना

Þ भावी दत्तक माता पिता द्वारा दिए गए पसंद के अनुसार SAA (Specialized Adoption Agency) द्वारा दिए गए विकल्प का भावी दत्तक माता पिता द्वारा स्वीकार करना।

Þ CARA द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र (no objection certificate)

Þ अगर भावी माता पिता चाहे तो पूर्व दत्तक फोस्टर केयर (foster care) ले सकते हैं। लेकिन व्यवहार में बहुत कम लोग इस विकल्प का प्रयोग करते हैं।

Þ कोर्ट ऑर्डर और conformity certificate की प्रक्रिया उसी तरह है जैसे देश के अंदर दत्तक पर लागू होता है। इसके बाद बच्चे के लिए पासपोर्ट, वीजा और एक्ज़िट सर्टिफिकेट लेना होता है।

दत्तक के बाद की प्रक्रिया

दत्तक माता पिता के साथ बच्चा जब उनके देश में चला जाता है तब वहाँ उसके लिए वहाँ की नागरिकता ली जाती है। इसके बाद भी दो वर्षों तक फॉलो अप होम विजिट उसी तरह होता है जैसे भारतीय दत्तक माता पिता के लिए होता है।            

विदेश में रहने वाले व्यक्ति द्वारा भारत में रहने वाले अपने रिश्तेदार के बच्चे को गोद लिए जाने की प्रक्रिया

दत्तक से पहले की प्रक्रिया

Þ AIAA या CA या IDM के सोशल वर्कर द्वारा होम स्टडी रिपोर्ट

Þ  AIAA या CA या IDM द्वारा भावी दत्तक माता पिता का CARINGS में रजिस्ट्रेशन और डॉक्युमेंट्स अपलोड करना

दत्तक की प्रक्रिया

Þ CARA द्वारा आरंभिक जाँच (scrutiny)

Þ DCPU (District Child Protection Unit) द्वारा वेरिफिकेशन और SARA (State Adoption Resource Authority) द्वारा सिफ़ारिश (recommendation)

Þ CARA (Central Adoption Resource Authority) द्वारा प्री-अप्रूवल

Þ भावी दत्तक माता पिता द्वारा कोर्ट में आवेदन देना और कोर्ट का आदेश प्राप्त करना

Þ CARA द्वारा No Objection Certificate और Conformity Certificate जारी करना

Þ बच्चे के लिए पासपोर्ट और एक्ज़िट डॉक्युमेंट्स प्राप्त करना।

दत्तक के बाद की प्रक्रिया

Þ बच्चा अपने माता पिता के देश पहुँच जाता है;

Þ वह की नागरिकता की प्राप्ति

Þ दो वर्षों तक पोस्ट एडोप्शन फॉलो अप। 

गोद लेने के संबन्धित जो प्रश्न समान्यतः किए जाते है, वे हैं:

अगर विदेश में रहने वाले व्यक्ति ने भारत में दत्तक संबंधी सभी प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं को पूरा कर लिया है तो क्या उसे अपने मूल देश में जाकर फिर से ये प्रक्रियाएँ पूरी करनी पड़ेगी?

       नहीं। हेग कॉन्वेंशन का अनुच्छेद 23 एवं 2017 के एडोप्शन रेग्युलेशन रेग्युलेशन 18 से अनुसार भारतीय कोर्ट के ऑर्डर के बाद CARA द्वारा Conformity सर्टिफिकेट जारी करना इस संबंध में पर्याप्त होगा और उसे अपने देश में इस प्रक्रिया को दुहराना नहीं होगा।  

बच्चे को गोद लेने के लिए किन डॉक्युमेंट्स की जरूरत होती है?

       एडोप्शन रेग्युलेशन 2017 के शेड्यूल VI के अनुसार रजिस्ट्रेशन के 30 दिनों के अंदर ये डॉक्युमेंट्स अपलोड करने होंगे।

Þ भावी दत्तक माता पिता की फोटो

Þ बर्थ सर्टिफिकेट यानि जन्म प्रमाण पत्र

Þ आधार कार्ड/ वोटर कार्ड/ ड्राइविंग लाइसेंस/ पासपोर्ट/ करंट इलेक्ट्रिसिटी बिल/ टेलिफोन बिल

Þ सैलरी स्लिप/ सरकार द्वारा जारी किया गय आय प्रमाण पत्र/ इनकम टैक्स रिटर्न

Þ अगर आप शादीशुदा है तो मैरिज सर्टिफिकेट

Þ अगर आप तलाकशुदा है तो डिवोर्स से संबंधित कागजात

Þ यदि आपके साथी यानि पति या पत्नी में से किसी की मृत्यु हो जाए तो उनका मृत्यु प्रमाण पत्र

Þ चिकित्सा प्रमाण पत्र जो यह साबित करे कि आप किसी संक्रामक या घातक बीमारी से पीड़ित नहीं हैं।

डॉक्युमेंट्स के लिए साइज आदि निर्धारित है। निर्धारित से अधिक बड़ा होने पर फ़ाइल अपलोड नहीं हो पाएगा। इसके वैबसाइट पर जाकर डॉक्युमेंट्स से संबन्धित सभी निर्देश पढ़े जा सकते हैं। किसी जानकारी के लिए इस आईडी पर मेल किया जा सकता है carahdesk.wcd@nic.in या इस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया जा सकता है 011-26180194/1800 111 311

गोद लेने के लिए हमें कितने समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है?

इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है क्योंकि यह गोद लेने के लिए बच्चे के आपके द्वारा दिए गए पसंद के बच्चे की उपलब्धता पर निर्भर करता है। लेकिन अगर बच्चा उपलब्ध हो तो उसके बाद की प्रक्रिया के लिए समय निर्धारित है। (शेड्यूल XIV एडोप्शन रेग्युलेशन 2017) गोद लेने के बाद दो वर्ष तक फॉलो अप किया जाता है।

बच्चे को कब गोद लिया जा सकता है?

जेजे एक्ट और दत्तक विनियमन 2017 के तहत गोद दिए जाने वाले बच्चे को इन पाँच वर्गों में रखा गया है:

1. परित्यक्त, सौंपे गए, निराश्रित बच्चा जो गोद लेने वाले से संबन्धित नहीं हो और जिसे गोद लेने वाला देश के अंदर रहता हो;

2. परित्यक्त, सौंपे गए, निराश्रित बच्चा जो गोद लेने वाले से संबन्धित नहीं हो और जिसे गोद लेने वाला देश के बाहर रहता हो;

3. बच्चा गोद लेने वाले से संबन्धित हो, और गोद लेने वाला देश के अंदर रहता हो;      

4. बच्चा गोद लेने वाले से संबन्धित हो, और गोद लेने वाला देश के बाहर रहता हो; और

5. गोद लेने वाला व्यक्ति बच्चे के सौतेले माता-पिता हो।

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जेजे एक्ट (सेक्शन 38, 56) और इसके संबन्धित विनियमन (नियम 4) के अनुसार चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (CWC) किसी ऐसे बच्चे को, जो अनाथ हो, जिसे छोड़ दिया गया हो, या जिसे सौंप दिया गया हो, को “गोद लेने के लिए कानूनी रूप से उपलब्ध (legally free for adoption)” घोषित करता है।

इस कानून के लिए “बच्चे से संबन्धित” व्यक्ति का अर्थ है चाचा-चाची, मामा-मामी, बुआ, मौसी, दादा-दादी और नाना-नानी।

अगर किसी व्यक्ति का अपने पूर्व पति/पत्नी से कोई संतान हो और वह दूसरी शादी करे तब उसके प्राकृतिक माता-पिता द्वारा सौतेले माता-पिता को वह बच्चा गोद देने के लिए सौंपा जा सकता है।       

अगर सड़क पर कोई अनाथ बच्चा मिले, तो क्या उसे गोद लिया जा सकता है?

नहीं। किसी भी बच्चे को, जिसमें कि सड़क पर या हॉस्पिटल में पड़ा अनाथ बच्चा भी शामिल है, सीधे गोद नहीं लिया जा सकता है। वैध दत्तक केवल CARA और अन्य अधिकृत एजेंसियों के द्वारा ही लिया जा सकता है। अगर आप को कोई ऐसा बच्चा मिले जिसे सहायता एवं देखभाल की जरूरत है, जैसे अनाथ बच्चा, तो आप इनमें से किसी से संपर्क कर सकते हैं:

Þ चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098

Þ स्थानीय पुलिस

Þ कोई भी Specialized Adoption Agency (SAA)

Þ Child Welfare Committee (CWC)

Þ District Child Protection Unit (DCPU).

 पर किसी भी हालत में बच्चे को स्वयं नहीं रख सकते हैं। क्योंकि ऐसा करना कानूनी अपराध में आएगा जिसके लिए छह महीने तक का कारावास और जुर्माना की सजा का प्रावधान है।

गोद लेने के लिए पंजीकृत माता पिता को बच्चा रेफर होने का क्या मानदंड होता है?

CARINGS में पंजीकरण के वरीयता क्रम के अनुसार बच्चे को रेफर किया जाता है। यह वरीयता क्रम कई आधारों से निश्चित होने के कारण ऊपर-नीचे हो सकता है। उदाहरण के लिए:

1. अगर आपका होम स्टडी रिपोर्ट पहले अपलोड हो गया है, लेकिन डॉक्युमेंट्स बाद में अपलोड हों तो वरीयता क्रम नीचे हो जाएगा;

2. अगर किसी अन्य भावी दत्तक माता पिता, जो आपसे पहले से रजिस्टर्ड हो, ने बच्चे के उम्र या राज्य के संबंध में अपनी पसंद को बदल दिया है तो आपकी वरीयता क्रम इससे प्रभावित हो सकती है।  

भारत में गोद लेने के लिए कौन पात्र है?

बच्चा गोद लेने वाले व्यक्ति (prospective adoptive parents- PAP) के पात्रता से संबंध में दो तरह के नियम हैं- सामान्य एवं विशेष।

सामान्य

1. वह शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ हो, आर्थिक रूप से सक्षम हो और जिसे ऐसी कोई मेडिकल समस्या नहीं हो जिससे उसके जीवन को खतरा हो;

2. गोद लिए जाने वाले बच्चे और गोद लेने वाले माता, पिता की आयु में अंतर कम-से-कम 25 वर्ष का हो।

विवाहित

1. विवाहित जोड़े जिनके विवाह को दो वर्ष या अधिक हुआ हो;

2. दोनों पति और पत्नी गोद लेने के लिए सहमत हो;

3. पति और पत्नी दोनों की कुल आयु 110 से अधिक नहीं हो।

अकेला व्यक्ति

1. अकेली महिला लड़का या लड़की गोद ले सकती है;

2. अकेला पुरुष लड़की को गोद नहीं ले सकता है;

3. गोद लेने वाले अकेले व्यक्ति (पुरुष या महिला) की आयु 55 वर्ष से अधिक नहीं हो;

4. अगर उसे कोई अपना बच्चा हो या उसने पहले से ही कोई बच्चा गोद ले रखा हो तो ऐसे बच्चों की कुल संख्या चार से अधिक नहीं हो। पर इसके लिए अपवाद है: अगर वह निम्नलिखित चार में से किसी तरह के बच्चे को गोद लेना चाहता है तब चार से अधिक बच्चे होने पर भी वह इन्हें गोद ले सकता/सकती है:

(1) विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (यानि जो शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्याङ्ग हो);

(2) Hard-to-place बच्चे (यानि जिन्हें तीन या अधिक लोगों को गोद देने के लिए रेफर किया गया हो लेकिन उन्होने उसे गोद लेने से मना कर दिया हो);

(3) किसी रिश्तेदार का बच्चा; और

(4) सौतेला बच्चा।

बच्चे को गोद लेने के लिए आयु के संबंध में क्या नियम हैं?

अगर कोई हिन्दू व्यक्ति किसी ईसाई या मुस्लिम से विवाह कर लेता है तो क्या वह बच्चा गोद ले सकता है?

हाँ ले सकता है। क्योंकि जेजे एक्ट बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों पर लागू होता है।

गोद लेने वाले व्यक्ति के लिए क्या कोई निश्चित आय सीमा है?

नहीं, कानून न्यूनतम आय की किसी सीमा के लिए कोई प्रावधान नहीं करता है। लेकिन होम विजिट के समय सामाजिक कार्यकर्ता आपके आर्थिक क्षमता का आंकलन करते हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि बच्चा उस घर में एक सामान्य पालन-पोषण पा सकता है या नहीं।     

क्या कोई दिव्यङ्ग दंपति बच्चा गोद ले सकते हैं?

हाँ, वे ले सकते हैं। लेकिन उनकी दिव्याङ्ग्ता की प्रकृति एवं प्रकार पर होम विजिट के समय सामाजिक कार्यकर्ता इस दृष्टिकोण से विचार करेंगे कि कहीं यह इस प्रकार की न हो जो माता-पिता के सामान्य कर्तव्य निभाने में बाधक हो।

क्या नवजात शिशु को गोद लिया जा सकता है?

कानूनी रूप से ऐसे करने में कोई रोक नहीं है। लेकिन प्रक्रियागत रूप से बच्चा तभी गोद दिया जा सकता है जब चाइल्ड वेलफेयर कमिटी उस “गोद लिए जाने के लिए कानूनी रूप से उपलब्ध” घोषित कर दे। ऐसा घोषित करने की प्रक्रिया में समान्यतः दो महीने का समय लगता है। इसलिए दो महीने का होने से पहले कोई बच्चा व्यवहारतः गोद नहीं लिया जा सकता है।

क्या गोद लेने के लिए किसी खास बच्चे का चुनाव किया जा सकता है?

बच्चे के जन्म का समय या तारीख, जाति, आदि का चुनाव नहीं किया जा सकता है। इसके पीछे सिद्धान्त यह है कि अनाथ बच्चों के विषय में ऐसे विवरण साधारणतः नहीं उपलब्ध होते हैं। बच्चों के रंग और चेहरे का चुनाव भी नहीं किया जा सकता है। पर बच्चे की उम्र, लिंग, राज्य आदि का चुनाव किया जा सकता है। इन सबंध में अपनी पसंद भावी दत्तक माता पिता को रजिस्ट्रेशन के समय ही देना होता है। बाद में आप के पसंद के विवरण का अगर कोई बच्चा उपलब्ध होता है तो उसे ही भावी माता पिता को रेफर किया जाता है।

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मैं अपनी पत्नी के पूर्व विवाह से उत्पन्न बच्चे को गोद लेना चाहता हूँ। क्या मैं ऐसा कर सकता हूँ?

हाँ, बिलकुल कर सकते हैं। एक या अधिक बच्चे अगर अपने जन्म देने वाले यानि जैविक माता-पिता द्वारा गोद देने के लिए सौंप (surrender) दिया जाय तो उसके सौतेले माता-पिता उसे गोद ले सकते हैं।

मैं विवाहित हूँ। मेरे दो बेटे हैं। अब मैं एक बेटी को गोद लेना चाहता हूँ। क्या मैं ऐसा कर सकता हूँ?

हाँ, आप ऐसा कर सकते हैं। अगर किसी दंपत्ति के तीन या अधिक बच्चे हो तो वे गोद तभी ले सकते हैं अगर वे जिस बच्चे को गोद लेना चाहते हों:

1. वह दिव्याङ्ग हो;

2. वह उनके किसी रिश्तेदार का बच्चा हो; और

3. वह उनका सौतेला बच्चा हो यानि उनके पति या पत्नी के पूर्व विवाह से उत्पन्न हो।

अगर मैं किसी बच्चे को गोद लेती हूँ, तो क्या ऐसा संभव है कि भविष्य में उसके जैविक माता-पिता आकर बच्चे पर अपना दावा करें?

नहीं। अगर एक बार गोद देने के संबंध में आदेश पारित हो जाता है, उसके बाद जैविक माता-पिता का उस बच्चे पर कोई अधिकार नहीं रह जाता है। वे भविष्य में कभी भी इसके लिए दावा नहीं कर सकते हैं।

किसी रिश्तेदार के बच्चे को गोद कैसे लिया जा सकता है?

दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-चाची, मामा-मामी, बुआ और मौसी ऐसे रिश्तेदार होते हैं जिन्हें गोद लेने की अनुमति है। एडोप्शन रेगुलेशन (दत्तक विनियमन) के सेक्शन 51 और 53 में तत्संबंधी प्रक्रिया दिया गया है।

विदेश में रहने वाला व्यक्ति अगर भारत में रहने वाले अपने किसी रिश्तेदार के बच्चे को गोद लेना चाहता है तो उसे एडोप्शन रेग्युलेशन 2017 के रेग्युलेशन 53 में दी गई प्रक्रियाओं को अपनाना होगा।

कोरोना में अनाथ हुए किसी बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया क्या है?

कोरोना काल में बड़ी संख्या में बच्चे अनाथ हुए हैं, जो विभिन्न संस्थाओं के पास हैं। अगर आप इन बच्चों को गोद लेना चाहते हैं तो उन सभी गाइडलाइंस और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा हो भारत गोद लेने के लिए CARA (Central Adoption Resource Authority) ने जारी किया है। इनके लिए वही प्रक्रियाएँ हैं जो साधारण अनाथ बच्चों के लिए है। अलग से कोई नियम नहीं हैं। 

गोद लिए गए बच्चे के कानूनी हक क्या होते हैं?

दत्तक के परिभाषा के अनुसार गोद लिया हुआ बच्चा गोद लेने वाले माता पिता का विधिक संतान बन जाता है। इसलिए उसके वही अधिकार एवं कर्तव्य होंगे जो एक प्रकृतिक संतान के होते हैं। उत्तराधिकार आदि सभी मामलों में उस पर वही नियम लागू होगा जो उसके गोद लेने वाले माता पिता पर लागू हो। वह गोद लेने वाले पिता की संपत्ति का उत्तराधिकारी होगा। अपने जैविक माता पिता की संपत्ति पर उसका कोई अधिकार नहीं होगा।

जैविक माता पिता से केवल एक संबंध रह जाता है वह यह कि गोद लिया जाने वाला बच्चा उस रिश्ते में विवाह नहीं कर सकता है जिसमें वह तब नहीं कर सकता था अगर वह अपने जैविक माता पिता के पास रहता। इसके अतिरिक्त किसी भी मामले में जैविक परिवार से उसका कोई संबंध नहीं रह जाता है। उसके सभी अधिकार और कर्तव्य गोद लेने वाले माता पिता से जुड़ जाते हैं।

भारत में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया में कितना खर्च लगता है?

जैसा कि एडोप्शन रेगुलेशन 2017 में उल्लेखित है, SAA इतना शुल्क ले सकता है:

1. होम स्टडी रिपोर्ट के लिए शुल्क- 6000 रु.

2. चाइल्ड केयर कोष के लिए- 40,000 रु.

3. गोद लेने के बाद होम विजिट के लिए- 2000 प्रति विजिट (ऐसे 4 विजिट होते हैं इसलिए कुल 8000)।

क्या कोर्ट बच्चे के नाम से कोई फ़िक्स्ड डिपॉजिट करने के लिए भी कहता है?

नहीं। एडोप्शन रेगुलेशन 2017 के सेक्शन 12(7) के अनुसार गोद लेने वाले माता पिता को किसी तरह का बॉण्ड भरने या बच्चे के नाम से कोई इनवेस्टमेंट करने के लिए नहीं कहा जाएगा। 

क्या लीव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े बच्चे को गोद ले सकते हैं?

नहीं। वर्तमान कानून के अनुसार केवल तीन वर्ग के लोग भारत में बच्चा गोद ले सकते हैं- विवाहित, अकेला पुरुष (अविवाहित/तलाक़शुदा/विधुर) और अकेली महिला (अविवाहित/तलाक़शुदा/विधवा)। इनके अलावा किसी और को गोद लेने का अधिकार नहीं है। इनमें लीव इन रिलेशनशिप वाले जोड़े, समलिंगी जोड़े, तीसरे लिंग के व्यक्ति आदि आते हैं।

अगर गोद लिया हुआ बच्चा बड़ा होने के बाद अपने जैविक माता पिता से मिलना चाहे जो क्या वह ऐसा कर सकता है?

एडोप्शन रेग्युलेशन 2017 का रेग्युलेशन 44 दत्तक लिए हुए बच्चे को अपने जैविक माता पिता के बारे में सूचना प्राप्त करने से संबन्धित है। इस रेग्युलेशन के अनुसार बच्चा यह सूचना प्राप्त कर सकता है। 

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