23 सितंबर, 1943 में स्पेन के मैड्रिड में एक बच्चे का जन्म हुआ। जब से उस बच्चे ने होश संभाला उसका एक ही सपना था फुटबाल खिलाड़ी बनाना और रियल मेड्रिड टीम की तरफ से खेलना। उसकी मेहनत रंग लायी। लगभग 20 की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते उसे रियल मेड्रिड टीम की तरफ से खेलने के लिए साइन कर लिया गया। खेल विशेषज्ञ उसे स्पेन का सर्वश्रेष्ठ भावी गोलकीपर मान रहे थे।

लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था। एक भयंकर सड़क दुर्घटना ने उसके शरीर के निचले आधे हिस्से को बेकार कर दिया। अब गोलकीपिंग को दूर वह अपने पैरों पर चल पाएगा यह भी संदेहास्पद हो गया। शरीर और मन दोनों ही दर्द से भरा था। जिंदगी में सब कुछ निराश करने वाला ही था। इस निराशा और अवसाद को दूर करने के लिए उसने गाना और कविता लिखना शुरू किया। बिस्तर पर पड़े-पड़े ही वह गिटार बजाने का अभ्यास भी करने लगा।
18 महीने बिस्तर पर पड़े-पड़े वह इतना सिद्धहस्त हो गया कि गिटार पर अपने लिखे गाने को गाने लगा। अब वह थोड़ा-बहुत चल सकता था लेकिन खेल तो वह अभी भी नहीं सकता था। इसलिए उसने गीत संगीत को ही अपने जीवन का हिस्सा बना लिया।
उस भयंकर हादसे के पाँच साल बाद उसने एक संगीत प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इसमें उसे प्रथम पुरस्कार जिस गाने के लिए मिला उसके बोल थे “लाइफ गोज ऑन द सेम” अर्थात जिंदगी पहले की तरह चलती जाती है।
यह कहानी है स्पेन के सबसे अधिक सफल गायक जूलियो इग्लेसियस की। आज वह अपने देश ही नहीं बल्कि दुनिया के 10 सर्वश्रेष्ठ गायकों में गिना जाता है। उसके गीतों के 30 करोड़ से अधिक एल्बम दुनिया भर में बिक चुके हैं। ग्रैमी और हॉलीवुड वॉक ऑफ फेम सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित जुलियो को यूनिसेफ ने 1985 में प्रदर्शनीय कला के लिए अपना विशेष दूत बनाया।
सच है, एक रास्ता बंद होने से ज़िंदगी नहीं रुकती है। वह तो चलती ही जाती है।
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